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Google ने मांगी माफी, कहा- गलती से एंड्रॉयड फोन में डाला आधार हेल्पलाइन नंबर

नई दिल्ली )- मोबाइल फोन में उपयोगकर्ता की मंजूरी के बिना यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) का कथित हेल्पलाइन नंबर के पीछे सर्च इंजन गूगल का हाथ है। गूगल ने अपनी इस गलती के लिए माफी मांगी है।

दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक गूगल ने इसके लिए माफी मांगी और कहा कि अनजाने में यूआईडीएआई के पुराने टोल फ्री नंबर 18003001947 समेत 112 अन्य हेल्पलाइन नंबर एंड्रॉयड फोन के ‘सेटअप विजार्ड’ में दर्ज हो गए थे। गूगल ने कहा कि, ‘हम इस कारण हुई तकलीफ के लिए माफी मांगते हैं। हम लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि यह ऐंड्रॉयड डिवाइस में अनधिकृत प्रवेश का मामला नहीं है। यूजर्स इस नंबर को मैन्यूअली डिलीट कर सकते हैं।’ बता दें कि UIDAI ने शुक्रवार दिन में ही स्पष्ट कर दिया था कि इस मामले से उसका कोई लेना-देना नहीं है और उसने इस बारे में टेलिकॉम ऑपरेटरों को कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया है। देर रात ऐंड्रॉयड की पैरंट कंपनी गूगल के स्पष्टीकरण से पूरे मामले से पर्दा उठा।

गूगल के अनुसार, हेल्पलाइन नंबर- 1800-300-1947- ऐंड्रॉयड फोन्स में 2014 में ही कोड किया गया था। वैसे यह बात और है कि कई यूजर्स ने अभी इसे अपने फोन पर देखा। गूगल के एक प्रवक्ता ने बताया, हमारी आंतरिक समीक्षा में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2014 में UIDAI हेल्पलाइन और आपदा हेल्पलाइन नंबर 112 अनजाने में ऐंड्रॉयड के सेटअप विज़र्ड में कोड कर दिया गया था और भारत के फोन निर्माता कंपनियों (OEMs) के लिए इसे जारी कर दिया गया था। तब से यह मोबाइल फोन यूजर्स के कॉन्टैक्ट लिस्ट में ये दोनों नंबर हैं। मोबाइल बदलने के बावजूद गूगल से पुराने नंबर ट्रांसफर हो जाते हैं और इस तरह ये नंबर नए फोनों में भी आ जा रहे थे। गूगल के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम इसको लेकर लोगों की चिताएं समझते हैं लेकिन आश्वस्त करना चाहते हैं कि यह ऐंड्रॉयड फोन के अनधिकृत ऐक्सेस का मामला नहीं है। बयान में यह भी कहा गया है कि कंपनी सेटअप विज़र्ड की अगली रिलीज में इसे फिक्स करने की दिशा में काम करेगी और मोबाइल फोन उत्पादकों (OEMs) को अगले कुछ सप्ताह में यह मुहैया करा दिया जाएगा।

गौरतलब है कि शुक्रवार की सुबह अचानक स्मार्टफोन उपयोग करने वाले हजारों लोगों को फोन बुक चेक करने पर उसमें खुद ही सुरक्षित हो गया यूआईडीएआई के नाम से 11 अंक का नंबर दिखाई दिया। कुछ लोगों ने ट्विटर पर यूआईडीएआई से स्पष्टीकरण मांगने की कोशिश की और इसी दौरान कुछ लोगों ने इसे फोन हैक होने का नतीजा बता दिया। जिसके बाद बहुत से लोगों ने अपने अड्रेस बुक का स्क्रीनशॉट शेयर करना शुरू कर दिया। यूजर्स कहने लगे कि टेलिकॉम कंपनियां खुद-ब-खुद UIDAI का हेल्पलाइन नंबर यूजर्स के फोन के कॉन्टैक्ट लिस्ट में डाल रही है। इसके बाद UIDAI ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी टेलिकॉम कंपनी को अपना हेल्पलाइन नंबर यूजर्स के कॉन्टैक्ट लिस्ट में फीड करने को नहीं कहा है।

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