Friday , October 19 2018
Breaking News
Home / हेल्थ / एच.एम.वी. में संस्कृत संभाषण कार्यशाला का समापन

एच.एम.वी. में संस्कृत संभाषण कार्यशाला का समापन

जालंधर। हंसराज महिला महाविद्यालय, जालन्धर में कॉलेज प्राचार्या प्रो. डॉ. (श्रीमती) अजय सरीन के योग्य नेतृत्व अधीन संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित दस दिवसीय संभाषण कार्यशाला के समापन दिवस के अवसर पर प्राचार्या प्रो. डॉ. (श्रीमती) अजय सरीन ने उपस्थित मुख्यातिथि संजीव श्री वास्तव एवं डॉ. उदयन आर्य, प्राचार्या गुरू विरजानंद गुरूकुल, करतारपुर को प्लांटर एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका हार्दिक अभिनंदन किया। प्राचार्या जी ने मंच पर आसीन मुख्यातिथि संजीव श्री वास्तव एवं डॉ. उदयन आर्य, आचार्या श्रीमती सुनीता धवन, टीचिंग स्टाफ एवं छात्राओं का इस दस दिवसीय संस्कृत संभाषण कार्यशाला की सफलता हेतु बधाई दी। उन्होनें कहा कि आर्य रत्न पदमश्री पूनम सूरी प्रधान, डीएवी प्रबन्धकृर्त समिति, नई दिल्ली हमेशा संस्कृत भाषा के प्रचार एवं प्रसार के लिए प्रयासरत रहते है। इस दस दिवसीय कार्यशाला के रूप में हमने संस्कृत भाषा के प्रचार का बीजा-रोपण किया है। अव उपस्थित छात्राओं का यह उत्तरदायित्व है कि वह इस भाषा के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी ले ताकि आगे चलकर एक विशाल वृक्ष बन कर आपको फल प्रदान करें क्योंकि भाषा चिरंजीवी है तत्पश्चात श्रीमती सुनीता धवन विभागाध्यक्षा, संस्कृत विभाग ने उपस्थित मुख्यातिथि संजीव श्री वास्तव, डॉ. हर्ष मेहता, संयोजक, संस्कृत भारती पंजाब, प्रांत, गुरूकुल के छात्र आदर्श, शिव रघुनंदन, नरेश कुमार एवं कॉलेज प्राचार्या डॉ. सरीन का स्वागत किया। उन्होनें कहा कि यह दस दिवसीय संभाषण कार्यशाला संस्कृत भारती पंजाब प्रांत के सराहनीय सहयोग से समपन्न हुई। इस कार्यशाला में लगभग 35 छात्राओं ने प्रतिभागिता देकर इसको सफल बनाया। इस कार्यशाला में संस्कृत भाषा के सुधी विद्वानों ने अपने संस्कृत भाषा के ज्ञान से छात्राओं को लाभान्वित किया एवं इस कार्यशाला का मुख्य उद्ेदश्य छात्राओं को संस्कृत भाषा के प्रति रूचि को जागृत करना था। उन्होनें बताया कि प्राचार्या प्रो. डॉ. (श्रीमती) अजय सरीन द्वारा वैदिक मूल्यों एवं संस्कृत भाषा के प्रति लगाव को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय में साप्ताहिक हवन यज्ञ, नॉन टीचिंग के लिए मासिक हवन यज्ञ, नैतिक शिक्षा प्रतियोगिता एवं नैतिक वैदिक चेतना शिविर का आयोजन होता रहता है। उन्होनें कहा कि संस्कृत सब भाषाओं की जननी है जिसका मुख्य स्रोत वेद है। संस्कृत हमारी संस्कृति की प्रधान वाहक के रूप से जानी जाती है। संस्कारवान बनने के लिए हमें संस्कृत का ज्ञान आवश्यक हे जिससे अन्य भाषाओं को सीखना सरल हो जाता है। संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी हो रहा है। छात्राओं ने इस दस दिवसीय संस्कृत भाषा संभाषण कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों एवं उनके जीवन में हुए परिवर्तनों को सांझा किया एवं अंत में छात्राओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। इस उपलक्ष्य में डॉ. जीवन देवी राजनैतिक विभाग एवं अन्य अध्यापकगण उपस्थित रहे।

About Front Page

Check Also

बड़ी खबर- गुलाब देवी अस्तपाल के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द…. जानिए इसलिए हुई कार्रवाई

जालंधर । गुलाब देवी अस्पताल स्थित रक्तवाहिनी कंपनी के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया …