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अमृतसर बाईपास रोड़ स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में सतसंग समागम का आयोजन

अमृतसर बाईपास रोड़ स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में सतसंग समागम का आयोजन किया गया। उपस्थित श्रद्घालुगणों को स6बोधित करते हुए संस्थान के प्रव1ता साध्वी प्रीती भारती ने कहा कि मानव की सर्वोच्च प्रेरणा प्रेम है। इसकी ज्योति के प्रकाश से मनुष्य उत्कृष्ट मानव और देवता बनता है। प्रेम आत्मा का प्रकाश है। आत्मा अपना स्तर ढूंढती है। प्रेम से प्रेरित कर्म जगत की सृष्टि करते हैं। जीवन समृद्घ बनाते हुए परम ध्येय तक पहुंचाते हैं। प्रेम में अहं या स्व के लिए कोई स्थान नहीं है। अपने लिए किए गए समस्त कार्य स्वार्थ में आते हैं। फल की आकांक्षा से कार्यो का प्रारंभ होने के कारण लेन-देन ही जीवन का साधारण नियम है। प्रेम पुरस्कार नहीं चाहता। यही प्रेम की परीक्षा है। प्रेम का ही दान प्रतिदान करता है। प्रेम की पूर्ति, लक्ष्य प्रेम ही है। प्रेम कृतार्थ होकर प्रसन्न होता है। गीता में भी इसी निष्काम कर्म की प्रेरणा मिलती है। प्रेम करने वाला ही इसका मर्म जानता है। बिना प्रेम कोई काम अपूर्ण रहता है। विश्व में जितने बड़े कार्य हुए हैं, सभी प्रेम से ही हुए हैं, पुरस्कार की इच्छा से नहीं।
साध्वी जी ने कहा कि जितना विराट प्रेम का स्वरुप होगा, व्य1ितत्व भी उतना श्रेष्ठ होता जाएगा। जैसा प्रेम स्वयं चाहते हैं, वैसा ही प्रेम दूसरों से करना सच्च प्रेम माना जाता है। प्रेम का प्रकाश केंद्र से दूर जाने पर क्षीण होने के कारण घृणा के अंधेरे में खो जाता है। प्रेम का प्रकाश सीमा के अनुसार घटता बढ़ता है। महापुरूष सभी प्राणियों को आत्मवत प्रेम करते हैं। प्रेम ही ईश्वर है। प्रेम करने वाले ही ईश्वर को जान पाते हैं। प्रेम करना ईश्वर का काम करना है। मानव प्रेम में ईश्वर की छाया है। जो जितना अधिक त्याग करता है उतना ही प्रेम कर सकता है। त्याग से प्रेम का जन्म होता है। त्याग हृदय की वृ8िा है। जो प्रेम के लिए मरता है, वही जीवित है। प्रेम करने वाले को कांटे प्रिय बन जाते हैं। सच्चे साधक को साधना-पथ के शूल आगे फूल बन जाते हैं। उन्हें विष अमृत लगता है। समय की सीमा में बंधा प्रेम सच्च नहीं रहता। प्रेम का अर्थ है पुरस्कार की कामना किए बिना परोपकार करना। सच्चे प्रेम का दीपक सदा एक जैसा जलता रहता है। प्रेम के दान में मूल्य नहीं लगता। सहानुभूति का एक श4द कई बार मानव जीवन को डूबने से बचा लेता है। कामनारहित निष्काम प्रेम जीवन को जोड़ता है। प्रेम मानवता को बचाने के लिए वरदान है।

 

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